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04.October.25

डियर X,

बेडोक रिज़र्वायर, सिंगापुर में एक और झीलनुमा जगह, जहाँ सारी दुनियावी मोह माया को पीछे छोड़कर बैठा जा सकता है। बेडोक रिज़र्वायर के पास की एक खुशनुमा सुबह । सामने हवा शांत पानी को छेड़ने की कोशिश कर रही है। बदले में पानी ने जैसे हवा को गीला कर दिया है। वही हवा मेरे चेहरे से होते हुए बालों को सहला रही है। कभी-कभी लगता है, प्रकृति के पास हमें देने को कितना कुछ है—इतना आनंद, इतनी शांति, इतना सुकून। और बदले में प्रकृति हम इंसानों से बस इतना चाहती है कि उसे उसके हाल पर छोड़ दें।

इन क्षणिक सुखों के बीच एक मन में एक खीझ सी उठती है । यह कैसा जीवन चुना हमने जिसमें आनंद के पल इतने बहुमूल्य हो गए हैं? जैसे ईश्वर ने जीवन के मूलधन में सिर्फ ” काम और बेचैनी” दिया हो और उसका थोड़ा सा ब्याज “आनंद और सुकून” ……

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