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20.September.25

डियर X,

एक और सप्ताह गुजर गया, अपनी खट्टी-मीठी यादों के साथ। हर सप्ताहांत, ठहरकर बैठना, गुजरे जीवन को देखना, बेतरतीब से ख्यालों पर चिट्ठियाँ लिखना — यह सबकुछ जीवन की खूबसूरत यादों में शुमार रहेगा।

बड़े-बड़े गुच्छेदार फूलों से बने विशाल जीवन की यह माला, साँसों की पतली सी डोर से गुथी है। एक पूरे इंसान के “हैं” और“थे” के इतने सालों के जीवन के बीच महज़ इतनी पतली सी साँसों की डोर। विश्वास नहीं होता कि ये छोटी सी दिखने वाली चीज़ें कितनी क़ीमती हो सकती हैं।

जीवन भर की स्मृतियों का पहाड़ भी छोटे-छोटे पलों की धूल से ही तो निर्मित है। मन पर गुज़रे जीवन की पूरी फ़िल्म चला लें, तो रोबोटिक फ़िल्म में सिर्फ़ कुछेक अंतरंग क्षण चमकते हैं। बाकी का जीवन घुप्प नीरस अँधेरा, जैसे विशाल आकाश में छिटके हुए चंद टिमटिमाते तारे। पर ये चमकदार क्षण इतने कीमती होते हैं कि इन्हें शब्दों में बाँधना आसान नहीं होता। वे क्षण जिन्हें जीते या जिनके बारे में सोचते दिल ठहर सा जाता है और समय अपनी रफ्तार भूल जाता है।

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