डिअर X,
नए साल की नई सुबह मुबारक। ३१ दिसंबर २०२४ की रात मैंने पहली चिट्ठी लिखी थी। तब मुझे कत्तई अंदाज़ा नहीं था कि वीकेंड वाली चिट्ठियों का सिलसिला पूरे एक साल चल पाएगा। वैसे भी हम पहाड़ देखकर पहाड़ कहाँ चढ़ते हैं; हम तो बस पैरों के नीचे की ज़मीन देखकर आगे बढ़ते हैं, और जहाँ रुकते हैं, वही हमारा पहाड़ होता है।
आज जब मैं अपनी पुरानी चिट्ठियों को पलटता हूँ, तो समझ नहीं आता कि यह मैंने किसी और के लिए लिखा था। लगता है जैसे मैंने सब कुछ स्वयं के लिए ही लिखा था। लिखते हुए विचार कितने स्पष्ट हो जाते हैं। मन की पुरानी धारणाओं पर मन ही सवाल करता है—कहीं कुछ तोड़ता है, कहीं कुछ जोड़ता है। इस साल भर की यात्रा में इन चिट्ठियों को लिखने के क्रम में कितना कुछ सीखने को मिला, शब्दों में कहना मुश्किल होगा।
जीवन में कुछ भी सपाट नहीं होता। परिस्थितियाँ किसी बड़े चक्र-सी हैं, जो धीरे-धीरे घूमता रहता है। हमारा जीवन परिस्थितियों से कम और उनके प्रभाव से अधिक निर्धारित होता है। अगर हम हर परिस्थिति से प्रभावित हुए, तो जीवन चक्करघिन्नी-सा होकर रह जाएगा। हम स्वयं को समझकर अपने आप पर काम करते हैं, ताकि मन हर परिस्थिति में सम बना रहे।
इन साल भर की चिट्ठियों को फिर से खंगालता हूँ, तो पाता हूँ कि मैंने सबसे ज़्यादा स्वयं के साथ समय बिताने के लिए लिखा होगा। अपने एकांत के साथ सहज होने को कहा होगा। अपने को पहचानना, स्वीकार करना, जीवन की क्षणभंगुरता को स्वीकार करना, प्रेम में डूबा मनुष्य होना—यही सब तो बिखरा पड़ा है इन चिट्ठियों में।
हर चीज़ को एक दिन रुक जाना होता है। पिछले एक साल से चल रही चिट्ठियों का सिलसिला भी अब थम जाएगा। इन चिट्ठियों के संग्रह को शायद कभी किसी किताब की शक्ल हासिल हो। परिस्थितियों की धूप-छाँव में तुम भी इन चिट्ठियों को खंगालकर मन शांत कर सकते हो।
और कुछ हो न हो, चूँकि चिट्ठियाँ पूरी तरह व्यक्तिगत होती हैं, इन पर डिस्क्लेमर चस्पा होता है, इन्हे पढ़ते हुए मुझे लगेगा मैंने कही तो दिल खोलकर रख दिया था।
अगले हफ्ते चिट्ठी नहीं आएगी। पर चीज़ें पूरी तरह कभी नहीं रुकतीं, सिर्फ अपना स्वरूप बदल लेती हैं। शायद किसी और रूप में मेरी लेखनी तुम्हें दिल का हाल बताती रहे। लिखना जीवन-सा है—वह कहाँ रुकने वाला। नदी दिशा भले बदल दे, किंतु बहते रहना ही उसका सुख है।
इस आख़िरी चिट्ठी के साथ, चिट्ठियों को अल्पविराम देते हुए,
विदा,
वीकेंड वाली चिट्ठी

