डियर X

About The Book
डियर X विनोद दूबे का पत्र संग्रह है, जिसमें 31 दिसंबर 2024 से 31 दिसंबर 2025 तक लिखी गई 52 चिट्ठियां शामिल हैं। हर सप्ताह की एक चिट्ठी के माध्यम से लेखक जीवन के किसी अलग अनुभव, विचार या भावना से संवाद करता है। पुस्तक का आरंभ वर्ष की अंतिम रात से होता है और धीरे-धीरे यह यात्रा स्मृति, ठहराव, मौन, प्रेम, वियोग, मानवता, बचपन, एकांत, समय, करुणा, उत्सव, जड़ों और जीवन के दूसरे पहलुओं तक पहुंचती है।
इन चिट्ठियों की खासियत यह है कि इनमें किसी एक व्यक्ति को संबोधित करने के बजाय ‘X’ को संबोधन बनाया गया है। यह X किसी अज्ञात व्यक्ति, प्रियजन, स्वयं लेखक या पाठक का प्रतिनिधि हो सकता है। इसी कारण निजी अनुभव धीरे धीरे व्यापक मानवीय अनुभव में बदल जाते हैं।
पुस्तक में लेखक ने आज के तेज और व्यस्त जीवन के बीच स्वयं से संवाद करने की आवश्यकता को भी सामने रखा है। ये चिट्ठियां किसी प्रवचन की तरह नहीं आतीं। वे जीवन के छोटे अनुभवों से प्रश्न उठाती हैं और पाठक को अपने भीतर झांकने का अवसर देती हैं। भूमिका में लेखक स्वयं इसे अपने भीतर के X से मिलने की कोशिश बताते हैं।
चिट्ठी
31 दिसंबर 2024
डियर X विनोद दूबे का पत्र संग्रह है, जिसमें 31 दिसंबर 2024 से 31 दिसंबर 2025 तक लिखी गई 52 चिट्ठियां शामिल हैं। हर सप्ताह की एक चिट्ठी के माध्यम से लेखक जीवन के किसी अलग अनुभव, विचार या भावना से संवाद करता है। पुस्तक का आरंभ वर्ष की अंतिम रात से होता है और धीरे-धीरे यह यात्रा स्मृति, ठहराव, मौन, प्रेम, वियोग, मानवता, बचपन, एकांत, समय, करुणा, उत्सव, जड़ों और जीवन के दूसरे पहलुओं तक पहुंचती है।
इन चिट्ठियों की खासियत यह है कि इनमें किसी एक व्यक्ति को संबोधित करने के बजाय ‘X’ को संबोधन बनाया गया है। यह X किसी अज्ञात व्यक्ति, प्रियजन, स्वयं लेखक या पाठक का प्रतिनिधि हो सकता है। इसी कारण निजी अनुभव धीरे धीरे व्यापक मानवीय अनुभव में बदल जाते हैं।
पुस्तक में लेखक ने आज के तेज और व्यस्त जीवन के बीच स्वयं से संवाद करने की आवश्यकता को भी सामने रखा है। ये चिट्ठियां किसी प्रवचन की तरह नहीं आतीं। वे जीवन के छोटे अनुभवों से प्रश्न उठाती हैं और पाठक को अपने भीतर झांकने का अवसर देती हैं। भूमिका में लेखक स्वयं इसे अपने भीतर के X से मिलने की कोशिश बताते हैं।
चिट्ठी
31 दिसंबर 2024
