01.01.2026

डिअर X, नए साल की नई सुबह मुबारक। ३१ दिसंबर २०२४ की रात मैंने पहली चिट्ठी लिखी थी। तब मुझे कत्तई अंदाज़ा नहीं था कि वीकेंड वाली चिट्ठियों का सिलसिला…

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20.December.25

डिअर X, साल जैसे-जैसे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, स्मृतियों को पकड़ने का मन तेज़ होता जा रहा है। नॉस्टेल्जिया संवेदनशील लोगों के साथ जीवन भर चलता है। इस…

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13.December.25

डिअर X, वंदे भारत ट्रेन से बनारस से दिल्ली की यात्रा में हूँ। सुबह का वक्त है। निर्मल वर्मा ने कहा था कि धुंध की भी एक धुन होती है।…

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06.December.25

डिअर X, छुट्टियों के दिन शुरू हो रहे हैं। दिसंबर में सिंगापुर सुस्ताता है। सड़कें, बसें, ट्रेन, मॉल—हर जगह जैसे अचानक लोग कम और जगह ज़्यादा हो जाती है। लगता…

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29.November.25

डिअर X, रातभर बारिश होती रही—रुक-रुक कर। सुबह आकाश की तरफ देखता हूँ। बादलों के कुछ गुच्छे बरसने के बाद सुस्ता रहे हैं। मैं अपने तलवों को बेंच के नीचे…

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22.November.25

डिअर X, मलेशिया में हूँ। छुट्टियों के दिन हैं। या यूँ कहूँ कि ज़िंदगी की आपाधापी से मोहलत के दिन हैं। सामने एक बड़ा-सा स्विमिंग पूल है। बच्चे पानी में…

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15.November.25

डिअर X, पार्क के बीचो-बीच एक कॉफी हाउस में बैठकर तुम्हें चिट्ठी लिख रहा हूँ। सामने तालाब है, सूर्यमुखी का फूल है और एक चिड़िया है। एकांत के क्षण कितने…

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08.November.25

डियर X, जिस पार्क में बैठा हूँ, चिड़ियों से ज़्यादा बच्चों का कलरव है। इस वीकेंड लगता है, तमाम पेरेंट्स अपने शिशुओं को लिए इसी पार्क में आ गए हैं।…

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01.November.25

डिअर X, फिलहाल गुज़री दिवाली की महक फ़िज़ाओं में अब भी बाक़ी है। मिठाइयों का जायका जीभ पर चढ़ा हुआ है, और कानों में नींद में भी पटाखे गूंज रहे…

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25.October.25

डियर X, जीवन में सबकुछ कितनी तेजी से बदलता जा रहा है—और हम रोबोट की तरह इस बदलाव के साथ चकरघिन्नी बने फिर रहे हैं । या फिर मेले का…

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